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उपनिषद – आत्मबोध और ब्रह्मचिंतन का प्रकाशपुंज

उपनिषदों का स्वरूप

उपनिषद सनातन दर्शन की सबसे सूक्ष्म और गहन रचनाएँ हैं, जो वेदों के चिंतनशील निष्कर्ष के रूप में प्रकट होती हैं। “उपनिषद” का तात्पर्य उस ज्ञान से है, जो शिष्य को गुरु की सन्निधि में मौन, संवाद और अनुभूति के माध्यम से प्राप्त होता है। इनमें आत्मतत्त्व, ब्रह्मतत्त्व, चेतना और परम सत्य पर गहन मनन किया गया है।

उपनिषदों का दार्शनिक महत्व

उपनिषद मानव को यह बोध कराते हैं कि वास्तविक सत्य शरीर या इंद्रियों में नहीं, बल्कि आत्मा की चेतना में निहित है। ये ग्रंथ मनुष्य को बाह्य भोगों से ऊपर उठाकर आंतरिक जागृति की ओर प्रेरित करते हैं। उपनिषदों का मूल संदेश है—

उपनिषद

प्रमुख उपनिषद

परंपरागत रूप से 108 उपनिषद माने जाते हैं, जिनमें से 10–13 प्रमुख उपनिषद अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ईशोपनिषद

सम्पूर्ण सृष्टि ईश्वर से व्याप्त है—त्याग और विवेक के साथ जीवन ही सत्य का मार्ग है।

केनोपनिषद

मन और इंद्रियों के पीछे कार्य करने वाली परम चेतना का बोध कराता है।

कठोपनिषद

नचिकेता–यम संवाद के माध्यम से आत्मा, मृत्यु और मोक्ष के रहस्य को प्रकट करता है।

प्रश्नोपनिषद

छह गूढ़ प्रश्नों के माध्यम से प्राण, ब्रह्म और जीवन-तत्त्व का ज्ञान कराता है।

मुण्डकोपनिषद

पराविद्या और अपराविद्या के माध्यम से सच्चे ज्ञान और अज्ञान का भेद स्पष्ट करता है।

माण्डूक्योपनिषद

ॐ (ओंकार) के माध्यम से आत्मा और चेतना के चार अवस्थाओं का दार्शनिक अर्थ समझाता है।

ऐतरेयोपनिषद

सृष्टि की उत्पत्ति और आत्मचेतना के विकास का गूढ़ विवेचन करता है।

छांदोग्योपनिषद

“तत्त्वमसि” के माध्यम से आत्मा और ब्रह्म की एकता का महान उपदेश देता है।

बृहदारण्यकोपनिषद

“अहं ब्रह्मास्मि” के द्वारा आत्मा और ब्रह्म की अभिन्नता का दिव्य ज्ञान प्रदान करता है।

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महावाक्य – उपनिषदों का सारतत्त्व

उपनिषदों का मूल दर्शन चार महान वाक्यों में निहित है, जिन्हें महावाक्य कहा जाता है—

उपनिषद

उपनिषद और मोक्ष

उपनिषद बताते हैं कि मोक्ष कर्म या भोग से नहीं, बल्कि ज्ञान और आत्मबोध से प्राप्त होता है।मोक्ष का अर्थ है-

जन्म-मरण से मुक्ति
अज्ञान का अंत
शाश्वत आनंद की अनुभूति
उपनिषद

उपनिषदों की समकालीन प्रासंगिकता

आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव के बीच उपनिषद आत्मिक संतुलन और मानसिक शांति का मार्ग दिखाते हैं। ये ग्रंथ मनुष्य को आत्मसंयम, जागरूकता और जीवन के वास्तविक उद्देश्य की पहचान कराते हैं। उपनिषदों का संदेश स्पष्ट है—सुख और शांति बाहरी संसार में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर निहित हैं।

मृत्योर्मा अमृतं गमय 🚩