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सनातन धर्म

जीवन को दिशा देने वाला शाश्वत पथ

सनातन धर्म विश्व की सबसे प्राचीन और दिव्य आध्यात्मिक परंपरा है। इसका आरंभ किसी एक काल या व्यक्ति से नहीं हुआ, क्योंकि यह समय से परे सत्य पर आधारित है। इसी कारण इसे “सनातन” कहा गया है — जो सदा था, सदा है और सदा रहेगा।

सनातन धर्म केवल पूजा या कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। यह मनुष्य को धर्म, कर्म, भक्ति और ज्ञान के माध्यम से आत्मिक शुद्धता, मानसिक शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

सनातन धर्म के चार पुरुषार्थ

धर्म

कर्तव्य, मर्यादा और नैतिक जीवन

अर्थ

जीवन निर्वाह और संतुलित समृद्धि

काम

संयमित इच्छाएँ और जीवन का संतुलन

मोक्ष

जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति
सनातन धर्म

पवित्र ग्रंथों का दिव्य ज्ञान

सनातन धर्म का ज्ञान अनेक पवित्र ग्रंथों के माध्यम से प्रवाहित होता है, जो मानव जीवन के प्रत्येक आयाम—धर्म, कर्म, भक्ति और आत्मबोध—को गहराई से प्रकाशित करते हैं।

वेद - दिव्य ज्ञान की प्रथम अमर धारा

वेद सनातन धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ हैं। इन्हें ईश्वरप्रदत्त ज्ञान माना गया है, जो ऋषियों द्वारा अनुभूत होकर मानवता तक पहुँचा।

उपनिषद - आत्मा और परम सत्य का साक्षात्कार

उपनिषद वेदों का सार और सनातन दर्शन की आत्मा हैं। इनमें आत्मा, परमात्मा और मोक्ष से संबंधित गूढ़ एवं सूक्ष्म ज्ञान का निरूपण किया गया है।

भगवद गीता जीवन का व्यवहारिक और दिव्य मार्गदर्शक

भगवद गीता भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य हुआ दिव्य संवाद है। यह ग्रंथ कर्म, भक्ति और ज्ञान के संतुलित मार्ग का उपदेश देता है।

रामायण - धर्म और मर्यादा का आदर्श स्वरूप

रामायण मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन की दिव्य कथा है। यह महाकाव्य सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा के मूल्यों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।

महाभारत - जीवन, धर्म और कर्तव्य का महाकाव्य

महाभारत विश्व का सबसे विशाल और गहन महाकाव्य है। इसमें धर्म और अधर्म के संघर्ष के माध्यम से जीवन, समाज और राजनीति के सूक्ष्म सत्य उजागर होते हैं।

पुराण कथा के माध्यम से दिव्य ज्ञान

पुराणों में सृष्टि की उत्पत्ति, देवताओं, ऋषियों और भगवान के अवतारों की पावन कथाएँ वर्णित हैं। ये ग्रंथ सरल और रोचक कथाओं के माध्यम से धर्म, भक्ति और सदाचार का गहन संदेश जन-जन तक पहुँचाते हैं।